आज ही अपने बच्चे को ओलंपियाड की तैयारी दिलाएँ!
ओलंपियाड-आधारित अभ्यास से बच्चों की सोचने-समझने की क्षमता बढ़ाएँ और प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए तैयार करें।
- कक्षा 1 से 12 तक
- नियमित प्रैक्टिस व मॉक टेस्ट
- राष्ट्रीय स्तर की तैयारी
- नवोदय व सैनिक स्कूल में सहायक
- स्कॉलरशिप व मेडल के अवसर
- 100% कॉन्सेप्ट क्लियरिटी
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माता-पिता को बच्चों को ओलंपियाड परीक्षा क्यों दिलानी चाहिए ?
हर माता-पिता चाहते हैं कि उनका बच्चा पढ़ाई में आगे बढ़े और आत्मविश्वास से भरा हो। ओलंपियाड परीक्षाएँ बच्चों को कम उम्र से ही सोचने, समझने और समस्याएँ हल करने की आदत सिखाती हैं।
- सोचने-समझने की क्षमता बढ़ती है
- ओलंपियाड की नियमित प्रैक्टिस से नवोदय और सैनिक स्कूल जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी अपने-आप मजबूत हो जाती है। बार-बार अभ्यास होने के कारण बच्चे परीक्षा आसानी से निकाल लेते हैं।
- ओलंपियाड परीक्षा बच्चों को NTSE, JEE, NEET जैसी बड़ी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए मानसिक रूप से तैयार करती है।
- नियमित प्रैक्टिस और मॉक टेस्ट से बच्चों का डर खत्म होता है और वे प्रश्नों को तेजी व सही तरीके से हल करना सीखते हैं।
- ओलंपियाड परीक्षाओं में अच्छा प्रदर्शन करने वाले बच्चों को आकर्षक स्कॉलरशिप मिलने का अवसर मिलता है।
- बच्चों को गोल्ड, सिल्वर, ब्रॉन्ज मेडल और प्रमाण-पत्र मिलते हैं, जिससे उनका उत्साह और आत्मविश्वास बढ़ता है।
अपने बच्चे को बनाइए ओलंपियाड में टॉप पर – आज ही नामांकन करें!
ओलंपियाड-आधारित तैयारी से बच्चे की सोचने-समझने की क्षमता बढ़ाएँ और उसे नवोदय, सैनिक स्कूल व अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए तैयार करें।
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वर्ष 2025 में चयनित विद्यार्थी
आज के समय में नवोदय विद्यालय, सैनिक स्कूल एवं विभिन्न छात्रवृत्ति (Scholarship) परीक्षाएँ बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव हैं। सही मार्गदर्शन, नियमित अध्ययन और माता-पिता के सहयोग से हर बच्चा इन परीक्षाओं में सफलता प्राप्त कर सकता है।
नवोदय और सैनिक स्कूल जैसी संस्थाएँ बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, अनुशासन और आत्मनिर्भरता सिखाती हैं, वहीं स्कॉलरशिप योजनाएँ आर्थिक रूप से कमजोर लेकिन प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को आगे बढ़ने का अवसर देती हैं।
यह सफलता अन्य विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा है कि अगर लक्ष्य बड़ा हो और मेहनत सच्ची हो, तो कोई भी सपना अधूरा नहीं रहता। माता-पिता से आग्रह है कि वे बच्चों की रुचि को समझें, उनका मनोबल बढ़ाएँ और उन्हें निरंतर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करें।


